राजस्थान के आना झील में अनेको कौए ओर मछलियों की लाशें देखकर दिल रो पड़ा मानो किसी ने पुराने जख्म को फिर हरा कर दिया हो , इस झील में किसी समय पर विभिन्न प्रकार की मछलियां गोते लगाती थी, ओर कौओं की काएं काएं से पूरी झील हरि भारी दिखती थी पर अब ऐसा नही है हाल ही में मिली ढेरों लाशों से यह बया हो गया है कि इंसान ने प्रदूषण फैलाने की अति को पार कर दिया है वह दिन दूर नही जब इंसान को एक दिन यही प्रदूषण ले डूबेगा। कुछ ही दिन पहले यह खबर आई थी की राजस्थान के सांभर झील में अनेको प्रवासी पक्षी भी मरे हुए पाए गए ऐसे में सीधा यह मालूम पड़ता है कि प्रदूषण ने झीलों को ही नही बल्कि नदियों को भी काफी बड़े स्तर पे दूषित करा हुआ है। मौत एक के बाद एक हो रही है जैसे कि शुक्रवार को यहां 20 कौवे मरे मिले और उसके बाद रविवार को भी लगभग 15 कौवों की लाश बिखरी मिली, सैकड़ों मछलियों की लाशें भी मिली सबको वहीं पे अधिकारियों द्वारा दफना दिया गया है। बढ़ते प्रदूषण से ऑक्सिजन की मात्रा का कम होना मछलियों की मौत का कारण है और वहां के आस पास के पक्षियों की हालत बेहद कमजोर है , कुछ उड़ने में असमर्थ लाचार एक ही जगह पड़े है।
वैसे तो यु.एन में इसकी चर्चा काफी समय से है जब से क्लाइमेट चेंज पे बात हुई है ग्रेटा नाम की लड़की जिसने आवाज़ उठाई पर्यावरण पे ओर इसकी गूंज हर एक के कानों तक गयी और अब लोग इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे है। भारत मे तो नरेंद्र मोदी द्वारा सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर भी बैन लगा , पर इसका कुछ फायदा होता नहीं दिख रहा है, हमे कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो काफी ठोस हो, ओर इन कुछ खास कदमो को काफी लंबे समय तक चलाना होगा जिससे कि पर्यावरण की सफाई हो और जल्द से जल्द जीवन की रक्षा का कार्य स्थापित हो। हमारी धरती पर पिछले 150 सालों से यह प्रदूषण पनपना शुरू हो गया था और अभी तक थमने का नाम नही ले रहा है।
प्रकृति के प्रति अभी हमारी ज़िम्मेदारियाँ खत्म नही हुई है, बल्कि ओर बढ़ ही गयी है। असल मे हो यह रहा है कि जैसे ही हमने प्रकृति की रक्षा छोड़ दी तो प्रकृति ने हमारी भी रक्षा करनी छोड़ दी।
पृथ्वी के पर्यावरण का संतुलन काफी असंतुलित हो गया है जिसका खामियाजा अब हर एक जीव को भुगतना पड़ रहा है । ऐसे में भारत के कुछ राज्य ऐसे है जहां पर लोगो को मास्क पहन के बाहर निकलना पड़ता है।अगर अब भी हमने पर्यावरण को नहीं बचाया तो हमें गंभीर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।


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