शिव के पाठ के दौरान होता है धर्मांतरण। कहीं आप भी इसकी चपेट में न आ जाएं रखें इन बातों का ध्यान



यह एक समस्या है कि आजकल के नागरिक या आम इंसान जो हिन्दू सनातनी हैं वह अपने त्योहारों की समझ ज़रा कम रखते है जिसके कारण धर्म परिवर्तन ज्यादा देखने को मिल रहे है। मिशनरी के लोग हिन्दू ग्रंथों में फेर बदल करके कुछ इस तरह से लिखते है कि बिल्कुल भी शक न हो कि इसमें कुछ बदलाव किया गया है। ईसाई मिशनरी के लोगों ने हिन्दू धर्म की चादर ओढ़ ली है ओर इस घटिया कार्य को अंजाम दे रहे है । वह लोग इसा मसीह की तस्वीर को कुछ इस तरीके से पेश करते है की वह हिन्दू देवी देवताओं से हूबहू मेल खायेओर समझ न रखने वाले लोग काफी आसानी से इनके चक्रों म फंस जाते है,  इन मिशनरी लोगो का काम ही यही होता है ज्यादा से ज्यादा धर्मांतरण करवाना। यह लोग गांव देहात में घूमकर गरीब असहारा लोगों को निशाना बनाते है। इसमे जो नामी इलाके है जहां से पादरी आये हुए है उन जगहों के नाम बलिया , ग़ाज़ीपुर और गोरखपुर है।




जानते है किस तरह से बनाते है बेवकूफ ।

यह लोग पहले कहते हैं कि इन पर भूत प्रेत का साया है फिर भूत प्रेत को उतारने की प्रक्रिया चालू करते है जो कि एक अंधविश्वास है जिसमे गरीब लोग जल्दी से झांसे में आ जाते है। धीरे धीरे वह उनके दिमाग में यह बात डालने की कोशिश करते हैं कि हिन्दू देवी देवता बहुत बुरे है, ओर उनके प्रति बहुत से गलत शब्दों का प्रयोग करते है, फिर परोसी जाती है प्रभो ईसू की मूर्ति और फिर नौकरी का लालच भी दिया जाता है जिसमे की यह लोग आसानी से फंस जाते है। पूजा पाठ में प्रभु ईसू को घुसा दिया जाता  है और फिर आरती भी करवाई जाती है।

बहुत ही संभल कर आयोजित होती है यह कथाएं जिसको नाम दिया जाता है कि शिव की कथा ताकि लोग आकर्षित हों और फिर उसमें चलते है बाइबिल के पाठ। कुछ इलाके जिनका नाम है तेलुआ, तिसौरा ओर ग़ाज़ीपुर उनमें दर्जन से ज़्यादा जगहों पर ऐसे परिवार है जो हिन्दू सनातन है पर उस घर की महिलाओं ने ईसू को  पूजना शुरू कर दिया है। इन इलाकों में ईसाई धर्म की शिक्षाएं भी दी जाती है, जिनको ग्रहण करके वहां के नौजवान पादरी बनते है या आस पास की चर्च में एडमिन की नौकरियां करते है।
यह शिक्षा के केंद्र इन्होंने अपने घर से दूर खोले हुयें है, ताकि खतरा कम बना रहे। काफी परिवार इनकी चपेट में आ चुके है और इसकी उन्हें धनराशि भी मिलती है।

यह जान के आपको आश्चर्य होगा कि यह काम पिछले 20 सालों से चल रहा है। और हाफिजपुर रसूलपुर, मिर्ज़ापुर जैसे इलाकों में बहुत से ऐसे लोग मिल जाएंगे जिनका परिवार ईसाई धर्म कबूल चुका है। यह जो नाम आपको हमने बताये इन इलाकों में चालू हो चुका है चर्च का निर्माण और इनकी जड़ें दिन पे दिन मज़बूत भी होती जा रही है ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाना सही है ? या धर्मांतरण से देश की स्थिति में परिवर्तन आएगा ? या फिर लोग अपनी जानी मानी सभ्यता को गंवा बैठेंगे ।

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